खामोश हूँ मैं मगर
उसे मेरी मजबूरी न समझना |
ठहरा हूँ जजंदगी की मोड पर मगर
मुझे कमजोर न समझना |
हाँ मैं भी रोता हूँ मगर
आलस की ठोकर ना समझा |
मैं भी ख़्वाहिश रखता हूँ मगर
मुझे मतलबी न समझना |
फिरता हूँ आवारा सा मैं, मगर
मुझे बेकार ना समझना |
खड़ा हूँ मैं अकेला, मगर
पीछे कोई सहारा ना समझना|
कभी सवालों का जवाब न मिले तो
उसे मेरा नजरअंदाज ना समझना|
लिखता हूँ खामोश पन्नों पर
इसे मेरा इजहार ना समझना|
बंधा हूँ एक अजीब रिश्ते से, मगर
खुद को वो जंजीर ना समझना |
-
खुद को वो जंजीर ना समझना
chinku
September 13, 2020
You might also like
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)
Search This Blog
Powered by Blogger.

No comments:
Post a Comment