• खुद को वो जंजीर ना समझना

    खामोश हूँ मैं मगर
    उसे मेरी मजबूरी न समझना |
    ठहरा हूँ जजंदगी की मोड पर मगर
    मुझे कमजोर न समझना |
    हाँ मैं भी रोता हूँ मगर
    आलस की ठोकर ना समझा |
    मैं भी ख़्वाहिश रखता हूँ मगर
    मुझे मतलबी न समझना |
    फिरता हूँ आवारा सा मैं, मगर
    मुझे बेकार ना समझना |
    खड़ा हूँ मैं अकेला, मगर
    पीछे कोई सहारा ना समझना|
    कभी सवालों का जवाब न मिले तो
    उसे मेरा नजरअंदाज ना समझना|
    लिखता हूँ खामोश पन्नों पर
    इसे मेरा इजहार ना समझना|
    बंधा हूँ एक अजीब रिश्ते से, मगर
    खुद को वो जंजीर ना समझना |

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