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    जिंदगी और परीक्षा

    ज़िंदगी ने जब अजमाया, परीक्षा का जब कहर बरपाया, हमने भी उसका प्रश्नपत्र उठाया, हल करने का उसको मैंने मन बनाया, जब पहली परीक्षा में पास ना आय...

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  • नया सवेरा

    नया सवेरा सुबह सवेरे उठा तो कोहरा छाया था रौशनी आती गई नज़ारा साफ होता गया कदम बढाता़ गया दूरियॉ घटती गई नज़रों में मंजिल थी  और मंजिल में न...

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  • SOMETHING STOPPED ME

    Sometimes I wanna cry a lot (many times)  But something stopped me.  Sometimes I wanna hate (many times)  But something stopped me.  Sometim...

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    प्रतीक्षा

    लहरों समान हलचल उठी है, उन सपनों को पाने खातिर, जिससे बुना है,मैंने अपना संसार सारा, चट्टान पर बैठी हुई निहार रही हूं, मैं अपना मंजिल रुपी क...

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    अब काजल नहीं लगाती हूँ

    अब काजल नहीं लगाती हूँ , आंखों में ।। तुम्हारे जाने के बाद जरूरत ही नहीं रही ।। ...

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    हाँ , वो मेरे पापा ही है जो मुझे एक पहचान दे गए

      मुझे कुछ बनने का , कुछ करने का अरमान दे गए हाँ वो मेरे पापा ही है , जो मुझे एक पहचान दे गए ...

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    मरहम सी कविता

    आधी रात को कोई दर्द, कोई याद कोई कविता, कोई कहानी गहरी नींद में दिलो दिमा...

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    नेह का एहसास

    तुम्हारी याद का बादल मुझे जब मुँह चिढ़ाता है मैं उसको पकड़ती हूँ तो वो दामन छुड़ाता है ...

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    ऐसा तो इश्क में होता है

    एक शाम जब तुम आये थे सूरज डूबा नहीं क्षितिज से उगा था सितारे निकले नहीं ...

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    जान कर भी अनजान क्यों है

    गुजर चुका है वह एक मुश्किल रास्ते से पर रहता ऐसे है जैसे कुछ हुआ ही ना हो उसे चिढ़, गुस्सा , रोना स...

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    है वो एक छोटी सी गुड़िया

    है वो एक छोटी सी गुड़िया लेकिन पापा की परी है वो शैतानी तो बहुत करती है लेकिन मां की द...

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    सोचता हूं दायरे में आ जाऊं

    हरकतें तो बचकानी हैं ही उनकी सोचता हूं कि बस उस दायरे में आ जाऊं नींद का क्या है वह तो आएगा ही ...

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    सीखना सीख लिया

    लम्हा जैसा भी हो, अब मैंने तो हंसना सीख लिया | दुःख अब जितना भी हो मैंने तो सहना सी...

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    खुद को वो जंजीर ना समझना

    खामोश हूँ मैं मगर उसे मेरी मजबूरी न समझना | ठहरा हूँ जजंदगी की मोड पर मगर मुझे कमजोर ...

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    फिक्र क्यों करती है

    फिक्र क्यों करती है तू मेरा इतना मैं जागता हूं और तू सो नहीं पाती मालूम नहीं तुझे पता ...

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    सिलसिला यूँही चलता रहे

    तेरे मेरे बातों का सिलसिला यूँही चलता रहे तेरे मेरे बीच तकरार और मनाने का सिलसिला यू...

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    मुझे खुली किताब बनाया

    खुशनसीब पहले था मैं या खुशनसीब अब हो गया दोस्ती नहीं थी तुमसे पर अब दोस्त से बढ़कर हो ...

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    चेहरा तेरा ही पाता हू़ं

    आईने के सामने जाता हूं चेहरा जाना पहचाना लगता है शक्ल तो मेरी है पर चेहरा तेरा ही पाता...

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    दूर भी तो नहीं है

    ना जानूं उसकी आवाज में ये कैसी मादकता है बातें करता ही रह जाता हूं फिर भी कुछ...

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