फिक्र क्यों करती है तू मेरा इतना
मैं जागता हूं
और तू सो नहीं पाती
मालूम नहीं तुझे पता कैसे चलता है
रोता हूँ मैं यहाँ
और तू उदास हो जाती
किक्र क्यों करती है तू मेरा इतना
कभी कुछ छिपाता हूं
पकडा ही जाता हूं
जब झूठ न पकड पाए
तू चिढ़ जाती है
डाँटता हूँ कभी अगर
तू गुस्सा सी जाती |
शायद लगता होगा तुम्हें,
भूल जाऊंगा मैं
लाख कोशिश करो भुलाने की,
भुलाने न दुंगा
जब तक हूँ मैं,
दूर होकर भी दूर जाने न दुंगा मैं|
किक्र क्यूँ करती है तू मेरा इतना
छुपाता नहीं हूँ कुछ ,
छुपाने भी नहीं दुंगा
परेशान करता हूँ और शायद करता रहुंगा
पर अकेला नहीं होने दुंगा मैं|
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फिक्र क्यों करती है
chinku
September 13, 2020
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