• नया सवेरा

    नया सवेरा

    सुबह सवेरे उठा तो
    कोहरा छाया था

    रौशनी आती गई
    नज़ारा साफ होता गया

    कदम बढाता़ गया
    दूरियॉ घटती गई

    नज़रों में मंजिल थी 
    और मंजिल में नज़र ||
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