गुजर चुका है वह एक मुश्किल रास्ते से
पर रहता ऐसे है जैसे कुछ हुआ ही ना हो
उसे चिढ़, गुस्सा , रोना सब आता है
दिखलाता है ऐसे है जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता
सहम सा गया है वह बीते गुजरे कल से
पर रहता है ऐसे है जैसे वह बेफिक्र हो
छिपा नहीं है किसी से कुछ भी
पर सब कुछ बतलाता भी नहीं है
जर्जर हो चुकी है जिंदगी उसकी
पर कोने में कहीं आस बाकी है
रोज एक आसा उसे जगाती है
कि किरण उसे अपनी ओर ले जाएगी
हंसकर मिलता सबसे है वह
फिर भी लोग उस से अनजान हैं
मालूम होता है जैसे सब कुछ मालूम हो उसे
पर जानकर भी अनजान क्यों है वह
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जान कर भी अनजान क्यों है
chinku
September 13, 2020
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