• दूर भी तो नहीं है

    ना जानूं उसकी आवाज में
    ये कैसी मादकता है
    बातें करता ही रह जाता हूं
    फिर भी कुछ रह ही जाती हैं|

    ना जानूं उसकी आँखों में
    ये कैसा आकर्षण है
    एक बार आँखें उनसे मिली तो
    बार बार उन्हें ही ढूंढे|

    उनकी हंसी की तो पूछो मत
    जब वह हंसती है
    मैं चुप हो जाता हूँ
    उसकी खुशी अपना सा पाता हूँ |

    एक वक्त था , गिर रहा था
    मैं निराशा की गर्त में
    शायद रौशनी खत्म होने को थी
    पर चिराग़ कहीं से उसने जलाया था |

    पास नहीं वह मेरे पर,
    दूर भी तो नहीं है
    मौजूद नहीं वह मेरे करीब पर,
    मौजुदगी का एहसास काफी है |

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