ना जानूं उसकी आवाज में
ये कैसी मादकता है
बातें करता ही रह जाता हूं
फिर भी कुछ रह ही जाती हैं|
ना जानूं उसकी आँखों में
ये कैसा आकर्षण है
एक बार आँखें उनसे मिली तो
बार बार उन्हें ही ढूंढे|
उनकी हंसी की तो पूछो मत
जब वह हंसती है
मैं चुप हो जाता हूँ
उसकी खुशी अपना सा पाता हूँ |
एक वक्त था , गिर रहा था
मैं निराशा की गर्त में
शायद रौशनी खत्म होने को थी
पर चिराग़ कहीं से उसने जलाया था |
पास नहीं वह मेरे पर,
दूर भी तो नहीं है
मौजूद नहीं वह मेरे करीब पर,
मौजुदगी का एहसास काफी है |
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दूर भी तो नहीं है
chinku
September 13, 2020
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