• नेह का एहसास



    तुम्हारी याद का बादल
    मुझे जब मुँह चिढ़ाता है
    मैं उसको पकड़ती हूँ
    तो वो दामन छुड़ाता है
    आईना हाथ से मेरे अचानक छूट जाता है
    उसी की चोट से मेरा
    स्वप्न भी टूट जाता है
    अकेला देखकर मुझको अंधेरों का दरिया भी
    खला से फूट जाता है
    खामोश मौसम भी
    मेरी खिल्ली उड़ाता है
    बरस पड़ती है आंखें तो और मन रूठ जाता है
    जब मैं अंधेरों से लिपट कर बैठ जाती हूं
    तो ऐसे में बस तुम्हारे नेह का एहसास ही मुझे आकर बनाता है।

                                    ~प्रेरणा सारवान


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